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“गोरखपुर में 30 टन कैंसर युक्त चना बरामद, खाने से कितना खतरनाक? पूरी रिपोर्ट”

 यह चने देखिए कितने टेस्टी और चमकदार लग 

 रहे हैं। अगर आप भुने चने खाने के शौकीन 

 है तो मुमकिन है इसे देख आपका मन ललचा 

 जाए। कोई आपको यह ऑफर करे तो शायद आप उसे 

 खा भी लें। लेकिन अगर यह फुटाने या भुने 

 चने आपने खा लिए तो कैंसर तक का खतरा हो 

 सकता है। क्योंकि बहुत सी चमकने वाली 

 चीजों की तरह इसके भी अपने नुकसान है। 

 क्यों और कैसे? सब कुछ आपको बतलाते हैं। 

 आपने वीडियो में जो भुने चने देखे वह 

 उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पकड़े गए 

 हैं। तस्वीरों में भले ही यह मुट्ठी भर 

 नजर आ रहे हो मगर असल में इनकी क्वांटिटी 

 30 टन ज्त हुई है। 30 टन यानी एक दो 10 50 

 या 100 500 किलो नहीं बल्कि पूरे 3000 

 किलो। इन चनों से भरे 750 बोरे पकड़ में 

 आए हैं। इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार 

 गजेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट के मुताबिक 

 इन मिलावटी चनों में केमिकल मिलाए गए ताकि 

 उन्हें दिखने में ज्यादा आकर्षक बनाया जा 

 सके। इस केमिकल का नाम ओरामीन ओ है। यह एक 

 तरह की इंडस्ट्रियल डाई है। यानी ऐसी डाई 

 जिसका इंडस्ट्रियल कामकाज में प्रयोग होता 

 है। इसे ब्राइट येलो या चमकदार पीला रंग 

 करने के काम में लिया जाता है। केमिकल 

 फार्मूला है C17H21 

 एन3HCL और अमीन हाइड्रोक्लोराइड। यह डाई 

 बड़े पैमाने पर कपड़े, चमड़े, प्रिंटिंग 

 वाली इंक की मैन्युफैक्चरिंग और पेपर 

 मैन्युफैक्चरिंग जैसी इंडस्ट्रीज में 

 इस्तेमाल होती है। इसका कलर बहुत चटक होता 

 है और कीमत बहुत सस्ती। इसलिए बतौर डाई ये 

 कई इंडस्ट्रीज की पहली पसंद है। मगर यह 

 बात इंडस्ट्रीज की है। आपके हमारे पेट की 

 नहीं। ओरामीन ओ केमिकल उस तरह की डाइस के 

 लिए तो अप्रूव्ड है मगर बतौर फूड कलर उसका 

 इस्तेमाल प्रतिबंधित है। वजह है उसके 

 गंभीर साइड इफेक्ट्स। औररामीन ओ को खाने 

 से मेजर हेल्थ इश्यूज हो सकते हैं। जैसे 

 लिवर डैमेज, किडनी पर बहुत बुरा असर और 

 जेनेटिक मटेरियल तक बदल जाना। और अगर 

 जेनेटिक मटेरियल या डीएनए में इसके चलते 

 परिवर्तन आया तो कैंसर का भी बड़ा खतरा बन 

 जाता है। इन्हें हमने अपनी हेल्थ बुलेटिन 

 सेहत में और भी डिटेल में बताया था जिसका 

 वो हिस्सा आपको इस वीडियो में आगे 

 दिखाएंगे। पहले आपको गोरखपुर वाले मामले 

 की कुछ और जानकारी दे दें। गोरखपुर में 

 उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य विभाग ने 

 कार्यवाही की है। फुटाने या भुने चने के 

 सारे एडल्टेटेड माल को सीज कर उसकी बिक्री 

 पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जिस गोदाम पर 

 यह एक्शन लिया गया उसे भी देखिए। इस वक्त 

 हम जहां मौजूद हैं, यह वही गोदाम है जहां 

 पर खाद्य विभाग ने छापेमारी के दौरान कुछ 

 बुझे हुए चने का सैंपल लेकर के उनकी सैंपल 

 की जांच की तो मौके पे कुछ रंग मिला हुआ 

 पाया और रंग के नाते रंग को जब जांच में 

 उनके प्रथम दृष्ट्या जो उनकी जांच थी 

 उसमें उन्होंने रंग का प्रभाव पाया और रंग 

 के प्रभाव से लीवर, किडनी और जो भी चीजें 

 हैं आप देख सकते हैं यहां सीसीटीवी कैमरा 

 भी लगा हुआ है और सब कुछ है यहां पर। तमाम 

 ये हमारे यहां पर जो जमीन के मालिक हैं जो 

 मकान के मालिक हैं वो भी खड़े हैं 

 जिन्होंने इसको किराए पे दे रखा है। क्या 

 नाम है? कब से जानते हैं और कब से ये चल 

 रहा है? 

 ये दो-ती साल से हैं। 

 हां। 

 दो या तीन साल से। तो क्या ये स्वयं इसका 

 वो भी करते हैं, पॉलिशिंग करते हैं या 

 फिर? 

 नहीं नहीं। ये तो बाहर से माल मंगाते हैं 

 और यहां से बेचते हैं। 

 बेच देते हैं। क्या नाम है इनके मालिक का? 

 इनका ओम प्रकाश। ओम प्रकाश नाम है। ये तीन 

 साल से आपके यहां काम कर रहे हैं। 

 इस मामले पर फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट 

 के असिस्टेंट कमिश्नर सुधीर सिंह ने भी 

 कुछ जरूरी जानकारी दी है। सुधीर सिंह ने 

 बताया कि संदिग्ध माल मध्य प्रदेश और 

 छत्तीसगढ़ से लाया गया था। जिसकी सूचना 

 गोरखपुर खाद्य विभाग को 16 दिसंबर को 

 मिली। दोनों राज्यों से भुने चने की कुल 

 दो गाड़ियां गोरखपुर के मेसर्स मां तारा 

 ट्रेडर्स पर आई। जानकारी पुख्ता होने पर 

 फूड डिपार्टमेंट की टीम ने उसी दिन छापा 

 मारकर 750 बोरी भुना चना बरामद कर लिया। 

 जब इस चने से सैंपल लेकर जांच कराई गई तो 

 इसमें सिंथेटिक डाई यानी आर्टिफिशियल डाई 

 मिली। यह वही ओरामीन ओ डाई थी जिसे खाने 

 की चीजों में इस्तेमाल करना प्रतिबंधित 

 है। इस बारे में सहायक आयुक्त सुधीर सिंह 

 ने बताया मौके पर दो नमूने लेकर जांच की 

 गई तो भुने चने में भारी मात्रा में 

 सिंथेटिक कलर मिलाए जाने की पुष्टि हुई। 

 स्पॉट से हमने 750 बोरी चने बरामद किए। हर 

 एक बोरी में 40 किलो चने आते हैं। इस पूरे 

 स्टॉक को सीज कर दिया गया है। बिक्री पर 

 रोक लगा दी गई है। सहायक खाद्य आयुक्त ने 

 कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से चना 

 आता है क्योंकि इन राज्यों में इसका 

 प्रोडक्शन ज्यादा है। वहां से सप्लाई 

 गोरखपुर आती है और फिर गोरखपुर से इसे 

 उत्तर प्रदेश के देवरिया, बस्ती, आजमगढ़, 

 मऊ, सिद्धार्थ नगर, गोरखपुर मंडल के 

 साथ-साथ और भी काफी दूर-दूर तक सप्लाई 

 किया जाता है। आगे उन्होंने बताया कि जो 

 भी लोग इस सप्लाई में शामिल पाए जाएंगे उन 

 सभी के खिलाफ कारवाई की जाएगी। सबकी 

 सप्लाई बंद कर दी जाएगी। लाइसेंस कैंसिल 

 कर दिए जाएंगे। आगे विभाग का प्लान है कि 

 इस मिलावटी चने के पूरे नेटवर्क का पता 

 लगाया जाए। फिर वो जहां तक भी फैला हो 

 अभियान चलाया जाएगा। उन्हें ढूंढा जाएगा 

 और हर एक साझेदार के खिलाफ गंभीरता से 

 कारवाई की जाएगी। और इस सिचुएशन को इतनी 

 गंभीरता से लिया क्यों जा रहा है और लिया 

 जाना भी क्यों चाहिए वो हमारी साथी सरबत 

 ने आपको सेहत के एक एपिसोड में बताया था। 

 वही एपिसोड आपके सामने एक बार फिर रख रहे 

 हैं। 

 यह वायरल रील देखिए। यह हैं भुने चने। 

 दावा किया जा रहा है कि भुने चनों में 

 ओरोमाइन ओ नाम की डाई मिलाई जा रही है। यह 

 डाई चने को चमकीला पीला रंग देती है। इससे 

 चने बढ़िया दिखते हैं। वो खाने में ज्यादा 

 कुरकुरे भी लगते हैं और इसलिए लोग भुने 

 चने खूब खरीदते हैं। अब डराने वाली बात यह 

 है कि औरमाइनो को खाने में इस्तेमाल नहीं 

 किया जा सकता। इस पर बैन लगा हुआ है। यह 

 शरीर के लिए बहुत नुकसानदेह है। WHO यानी 

 कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कहा है 

 कि इससे कैंसर तक हो सकता है। भुने जनों 

 में औरों की मिलावट का मामला इतना ज्यादा 

 बढ़ गया है कि राज्यसभा सांसद प्रियंका 

 चतुर्वेदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री 

 जेपी नड्डा को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें 

 उन्होंने मंत्रालय से और इनओ की मिलावट पर 

 नेशनल हेल्थ अलर्ट जारी करने की गुजारिश 

 की है। यह भी कहा है कि पूरे देश में भुने 

 चनों की जांच हो और मिलावट करने वालों पर 

 कड़ी कारवाई हो। भुनेरे चने एक बहुत ही 

 पॉपुलर स्नैक है। लोग इसे खूब खाते हैं। 

 बाजार में यह बड़ी आसानी से मिल भी जाते 

 हैं। लेकिन अब इसमें ओरोमाइनो की मिलावट 

 वाली खबरों ने लोगों को डरा दिया है। तो 

 यह ओरोमाइनो है क्या? खाने में इसके 

 इस्तेमाल पर बैन क्यों लगा है? और हम 

 मिलावटी चने कैसे पहचान सकते हैं? यह सब 

 हमने पूछा पारस हेल्थ गुरुग्राम में 

 डाइटिशियन ऋष्या आले से। डाइटिशियन दृश्य 

 बताती है कि ओरामाइनो पीले रंग की डाई है। 

 इसका इस्तेमाल कपड़े, लेदर और पेपर 

 इंडस्ट्री में किया जाता है। यह कुछ-कुछ 

 हल्दी जैसा दिखता है। यह आसानी से मिल 

 जाता है और सस्ता भी होता है। मिलावट करने 

 वाले इसे चने और खाने की दूसरी चीजों में 

 इसलिए डालते हैं ताकि वह ज्यादा चमकीली और 

 आकर्षक दिखे। उनकी बिक्री बढ़े। लेकिन फूड 

 सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत 

 और माइनों को फूड कलर के तौर पर इस्तेमाल 

 नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह गैरकानूनी 

 है। रिसर्च से यह साबित हुआ है कि ओरमाइनो 

 से लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचता है। 

 स्प्लीन का साइज बढ़ सकता है। स्प्लीन एक 

 मुलायम छोटा लेकिन बेहद जरूरी अंग है। यह 

 पेट के ऊपरी बाएं हिस्से में पसलियों के 

 ठीक नीचे होता है। इसका मेन काम शरीर को 

 इंफेक्शन से बचाना और खून को फिल्टर करना 

 है। स्प्लीन का साइज बढ़ने से एनीमिया 

 यानी शरीर में खून की कमी हो सकती है। 

 इनफेक्शन होने का रिस्क बढ़ जाता है। 

 स्प्लीन फट भी सकती है जिससे इंटरनल 

 ब्लीडिंग हो सकती है और यह एक जानलेवा 

 स्थिति है। शरीर में औरों की ज्यादा 

 मात्रा जाने से डीएनए में बदलाव भी हो 

 सकता है और इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता 

 है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक 

 एजेंसी है आईएआरसी यानी कि इंटरनेशनल 

 एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर। इसने ओरमाइनो 

 को ग्रुप टू बी कार्सिनोजन माना है। इसका 

 मतलब है कि ओरमाइनो से कैंसर का रिस्क है। 

 इसलिए यह बेहद जरूरी है कि भुने चने में 

 इस डाई की मिलावट ना हो। इसके लिए सरकार 

 को देश भर में भुने हुए चनों की जांच करनी 

 चाहिए। अगर उनमें मिलावट मिलती है तो 

 दोषियों पर सख्त कारवाई होनी चाहिए। आप 

 खुद भी मिलावटी भुने चों की पहचान कर सकते 

 हैं। अगर चने जरूरत से ज्यादा पीले और 

 चमकीले लग रहे हैं या गीले हाथों से छूने 

 पर रंग छूटने लगे तो ऐसे चने मत खाइए। 

 उनमें मिलावट हो सकती है। हमेशा भरोसेमंद 

 दुकान से ही चने खरीदिए। आप बाजार से चना 

 खरीद सकते हैं और उसे घर पर ही भूल लीजिए। 

 यह ज्यादा सेफ है। 

 

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